बाबा काल भैरव की शरण में योगी: अहिल्याबाई के सम्मान पर कांग्रेस को घेरा, विकास को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता।
धर्मनगरी काशी में मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण और अहिल्याबाई की प्रतिमा से जुड़े विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को वाराणसी पहुंचे। हालांकि, प्रशासन की भारी तैयारियों और बिछे हुए ‘रेड कार्पेट’ के बावजूद मुख्यमंत्री मणिकर्णिका घाट नहीं गए, लेकिन सर्किट हाउस से उन्होंने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया।
1. विरासत और विकास पर सियासी जंग
सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:- आस्था का अपमान: कांग्रेस का इतिहास भारत की सांस्कृतिक आस्था को अपमानित करने का रहा है।
- अहिल्याबाई का सम्मान: विश्व प्रसिद्ध काशी में माता अहिल्याबाई के सम्मान को ठेस पहुँचाने की कोशिशें की जा रही हैं।
- विकास में बाधा: जब भी काशी विकास के पथ पर आगे बढ़ती है, कुछ लोग अड़ंगे लगाने आ जाते हैं। यही माहौल ‘काशी विश्वनाथ कॉरिडोर’ के निर्माण के वक्त भी बनाया गया था।
2. रेड कार्पेट बिछा रह गया, घाट नहीं पहुंचे मुख्यमंत्री
मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विवाद को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था।- सुरक्षा और तैयारी: सतुआ बाबा आश्रम से घाट तक रेड कार्पेट बिछाया गया था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे।
- दर्शन-पूजन: मुख्यमंत्री ने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और बाबा काल भैरव के दर्शन किए, लेकिन घाट निरीक्षण के संभावित कार्यक्रम को टालते हुए वे सीधे सर्किट हाउस चले गए। उनके इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है।