ऋषिकेश मेयर की पहल पर परिवार ने लिया अंगदान का ऐतिहासिक फैसला
कहते हैं कि परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है। इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है बिहार के रहने वाले 42 वर्षीय रघु पासवान ने। पेशे से राजमिस्त्री रघु आज भले ही दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों में बसी चमक और शरीर के अंगों की धड़कन अब पांच…