ऋषिकेश मेयर की पहल पर परिवार ने लिया अंगदान का ऐतिहासिक फैसला
कहते हैं कि परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है। इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है बिहार के रहने वाले 42 वर्षीय रघु पासवान ने। पेशे से राजमिस्त्री रघु आज भले ही दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों में बसी चमक और शरीर के अंगों की धड़कन अब पांच अन्य लोगों के जीवन को रोशन करेगी। एम्स ऋषिकेश में हुई इस कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन (अंगदान) प्रक्रिया ने मानवता के लिए एक नई मिसाल पेश की है।
दुर्घटना के बाद कोमा में चले गए थे रघु
मूल रूप से बिहार निवासी रघु पासवान कुछ दिन पहले एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। गंभीर हालत में उन्हें एम्स ऋषिकेश भर्ती कराया गया। न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश अरोड़ा के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन रघु नॉन-रिवर्सिबल कोमा में चले गए। तमाम मेडिकल जांचों के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया।
मेयर की पहल और परिजनों का साहसिक निर्णय
दुख की इस घड़ी में ऋषिकेश के मेयर शंभू पासवान ने सक्रिय भूमिका निभाई और पीड़ित परिवार को अंगदान के महत्व के बारे में समझाया। अपने प्रियजन को खोने के गम के बावजूद, रघु के परिवार ने एक अत्यंत साहसिक फैसला लिया—दूसरों को जीवन देने का फैसला। परिजनों की सहमति के बाद नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) के दिशा-निर्देशों के तहत अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।
अंगों का सफर: एम्स दिल्ली से PGI चंडीगढ़ तक
एम्स के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भारत भूषण भारद्वाज ने बताया कि रघु के अंगों को तीन प्रमुख अस्पतालों में भर्ती जरूरतमंद मरीजों तक पहुँचाया गया है:
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PGI चंडीगढ़: यहां भर्ती तीन मरीजों को किडनी, लीवर और पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
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AIIMS दिल्ली: एक गंभीर मरीज को रघु की दूसरी किडनी दी गई है।
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आर्मी हॉस्पिटल RR, दिल्ली: यहां भर्ती एक मरीज को हार्ट (हृदय) ट्रांसप्लांट कर नया जीवन दिया जाएगा।
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आई बैंक (AIIMS): रघु की दोनों आंखें (कॉर्निया) सुरक्षित रख ली गई हैं, जिनसे दो लोगों की आंखों की रोशनी वापस आएगी।