संविधान और गांधीवादी सोच पर संकट: राहुल गांधी ने आरएसएस और पीएम मोदी को जमकर घेरा।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और स्थानीय सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। भुएमऊ गेस्ट हाउस में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक और ऊंचाहार के उमरन गांव में ‘मनरेगा चौपाल’ के जरिए राहुल गांधी ने आगामी पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट कर दी।

“डरना नहीं है, लड़ते रहना है”

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सरकार धर्म का मुखौटा पहनकर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने वर्तमान सरकार को ‘पूंजीपतियों की सरकार’ करार देते हुए कहा कि सत्ता का केंद्रीकरण प्रधानमंत्री के हाथों और ब्यूरोक्रेसी में सिमट कर रह गया है, जबकि कांग्रेस पंचायतों को वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाना चाहती थी।

मनरेगा और पूंजीवाद पर कड़ा प्रहार

राहुल गांधी ने मनरेगा का मुद्दा उठाते हुए कहा, “गांधी जी का नाम बदलकर मोदी सरकार ने न केवल उनका अपमान किया, बल्कि गरीबों का सुरक्षा कवच भी छीन लिया है। हमारी सोच गरीबों को न्यूनतम मजदूरी की गारंटी देना थी, लेकिन मोदी जी चाहते हैं कि देश का सारा धन अडानी और अंबानी की जेब में चला जाए।” उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की जमीनें छीनकर उद्योगपतियों के हवाले की जा रही हैं।

युवा जोश और चुनावी रणनीति

राहुल गांधी ने साफ संकेत दिए कि आगामी पंचायत चुनावों में कांग्रेस युवा चेहरों पर दांव लगाएगी। संगठन को नए विचारों और युवा ऊर्जा के साथ जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने रायबरेली प्रीमियर लीग का उद्घाटन कर युवाओं से सीधे जुड़ने का प्रयास किया।

ऊंचाहार की चौपाल: सियासी जमीन की जुताई

ऊंचाहार के उमरन गांव में आयोजित चौपाल में उमड़ी भारी भीड़ ने विरोधियों की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल ने जानबूझकर समाजवादी पार्टी के इस गढ़ को चौपाल के लिए चुना, जो भविष्य में कांग्रेस-सपा गठबंधन के तहत सीट शेयरिंग की नई पटकथा लिख सकता है।

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